Kaalo Calendar

अनंत चतुर्दशी (गणेश विसर्जन)

Anant Chaturdashi (Ganesh Visarjan)

अगली तिथि

अनंत चतुर्दशी (गणेश विसर्जन)

मंगलवार, 14 सितंबर 2027

321 दिन बाद

अनंत चतुर्दशी (गणेश विसर्जन) के बारे में

गणेशोत्सव का अंतिम दिन; गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन।

अनंत चतुर्दशी 2026 की मुख्य तिथियां व समय

  • दिनांक: 25 सितंबर 2026 (शुक्रवार)

  • चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: गुरुवार, 24 सितंबर 2026, रात 11:18 बजे

  • चतुर्दशी तिथि समाप्त: शुक्रवार, 25 सितंबर 2026, रात 11:06 बजे

शहर के अनुसार पूजा व विसर्जन मुहूर्त

सूर्योदय हर शहर में अलग होता है, इसलिए नीचे दी गई अवधियाँ भी अलग हैं। चौघड़िया के नाम बताते हैं कि दिन का कौन-सा भाग शुभ माना गया है: चर, लाभ, अमृत और शुभ, ये चारों प्रतिमा लेकर निकलने के लिए उपयुक्त माने जाते हैं।

दिल्ली (नई दिल्ली)

  • अनंत चतुर्दशी पूजा मुहूर्त: सुबह 06:11 बजे से रात 11:06 बजे तक

  • प्रातःकाल विसर्जन (चर, लाभ, अमृत): सुबह 06:11 से 10:42 बजे तक

  • दोपहर (शुभ): 12:13 से 01:43 बजे तक

  • सायंकाल (चर): शाम 04:44 से 06:14 बजे तक

  • रात्रि (लाभ): रात 09:14 से 10:43 बजे तक

मुंबई

  • अनंत चतुर्दशी पूजा मुहूर्त: सुबह 06:29 बजे से रात 11:06 बजे तक

  • प्रातःकाल विसर्जन (चर, लाभ, अमृत): सुबह 06:29 से 10:59 बजे तक

  • दोपहर (शुभ): 12:29 से 01:59 बजे तक

  • सायंकाल (चर): शाम 04:59 से 06:29 बजे तक

  • रात्रि (लाभ): रात 09:29 से 10:59 बजे तक

पुणे

  • अनंत चतुर्दशी पूजा मुहूर्त: सुबह 06:25 बजे से रात 11:06 बजे तक

  • प्रातःकाल विसर्जन (चर, लाभ, अमृत): सुबह 06:25 से 10:55 बजे तक

  • दोपहर (शुभ): 12:25 से 01:55 बजे तक

  • सायंकाल (चर): शाम 04:55 से 06:25 बजे तक

  • रात्रि (लाभ): रात 09:25 से 10:55 बजे तक

गणेश विसर्जन

दस दिन तक प्रतिमा को घर के मेहमान की तरह रखा जाता है, जगाया जाता है, भोग लगता है, विश्राम कराया जाता है। अनंत चतुर्दशी पर यह प्रवास पूरा होता है। परिवार अंतिम आरती करता है, मोदक का भोग लगाता है और सेवा में रह गई कमी के लिए क्षमा माँगता है, फिर ढोल के साथ प्रतिमा को ले जाकर नदी, तालाब या कृत्रिम विसर्जन कुंड में विसर्जित किया जाता है। विदाई की पंक्ति अलविदा नहीं, एक निवेदन है: अगले बरस जल्दी आना। अब कई घर मिट्टी की प्रतिमा और नगर निगम के विसर्जन कुंड चुनते हैं ताकि जलाशयों पर बोझ न पड़े।

अनंत सूत्र का व्रत

पुरानी परंपरा विष्णु के अनंत स्वरूप से जुड़ी है, उस रूप से जिसका कोई अंत नहीं। भक्त उपवास रखते हैं, अनंत पूजा करते हैं, और रेशम या सूत का चौदह गाँठों वाला धागा बाँधते हैं, पुरुष दाहिनी भुजा पर और स्त्रियाँ बाईं पर। चौदह गाँठों को चौदह लोकों का प्रतीक माना जाता है। महाभारत में कृष्ण युधिष्ठिर को वनवास के समय यह व्रत करने की सलाह देते हैं ताकि पांडव खोया हुआ वैभव पुनः पा सकें, इसीलिए यह दिन कठिनाई के बाद स्थिरता लौटने से जोड़ा जाता है। धागा तब तक पहना जाता है जब तक वह स्वयं न उतर जाए।

सही समय चुनना

पूजा की अवधि सूर्योदय से चतुर्दशी तिथि की समाप्ति तक चलती है, इसीलिए यह असामान्य रूप से लंबी दिखती है। विसर्जन पूरी अवधि में नहीं, बल्कि किसी एक चौघड़िया में किया जाता है, और दिन भर में ऐसे चार विकल्प मिलते हैं। यही कारण है कि अलग-अलग मोहल्लों की शोभायात्राएँ कई घंटों के अंतर से निकलती हैं, और कोई परिवार सुबह या रात, किसी भी समय विसर्जन चुन सकता है; दोनों ही सही हैं। यदि आपका शहर ऊपर नहीं है, तो समय तय करने से पहले अपने स्थान का चौघड़िया ऊपर दिए पंचांग में, या Kaalo ऐप में देख लें।

आगामी तिथियाँ

  • 2027मंगलवार, 14 सितंबर 2027अगला
  • 2028शनिवार, 2 सितंबर 2028

इस दिन का पंचांग

मंगलवार, 14 सितंबर 2027

तिथि
चतुर्दशी (शुक्ल)2:49 am, 15 सित॰ तक
नक्षत्र
धनिष्ठा8:59 am तक
योग
सुकर्मा
करण
गर
वार
मंगलवार
चंद्र राशि
कुम्भ
सूर्य राशि
सिंह
सूर्योदय
6:05 am
सूर्यास्त
6:28 pm
चंद्रोदय
5:31 pm
चंद्रास्त
4:27 am
विक्रम संवत
VS 2084
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
मास (अमांत)
भाद्रपद
राहु काल3:22 pm – 4:55 pm
पूरा पंचांग देखें →

अन्य त्योहार