कृष्ण जन्माष्टमी
Krishna Janmashtami
अगली तिथि
कृष्ण जन्माष्टमी
बुधवार, 25 अगस्त 2027
348 दिन बाद
Ashtami spans Aug 24, 20:25 - Aug 25, 19:20 IST; Smarta tradition observes Aug 24 night, Vaishnava Aug 25
कृष्ण जन्माष्टमी के बारे में
कृष्ण जन्माष्टमी विष्णु के आठवें अवतार कृष्ण के जन्म का दिन है, जिनका जन्म मथुरा की कारागार में आधी रात को हुआ था। भक्त दिन भर फलाहारी व्रत रखते हैं, घर में पालना और छोटी झांकी सजाते हैं, बच्चों को कृष्ण और राधा के रूप में तैयार करते हैं, और बारह बजे तक जागते हैं, जब मूर्ति का अभिषेक कर, नए वस्त्र पहनाकर उसे पालने में झुलाया जाता है और जय कन्हैया लाल की के जयकारे लगते हैं। पूजा निशीथ काल में होती है, जो आधी रात के आसपास कुछ ही मिनट की अवधि है, और व्रत का पारण अगली सुबह भी पड़ सकता है।
कृष्ण जन्माष्टमी 2026 की मुख्य तिथियां व समय
दिनांक: शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
अष्टमी तिथि प्रारंभ: 4 सितंबर 2026 को रात (तड़के) 02:25 AM बजे से
अष्टमी तिथि समाप्त: 5 सितंबर 2026 को रात 12:13 AM बजे तक
रोहिणी नक्षत्र: रात 4 सितंबर 2026 को रात (तड़के) 12:29 AM से प्रारंभ होकर रात 11:04 PM बजे तक रहेगा
निशीथ काल पूजा मुहूर्त: 11:57 PM से मध्यरात्रि 12:43 AM (5 सितंबर) तक (अवधि: 46 मिनट)
पारण का समय: 5 सितंबर 2026 को सुबह 06:01 AM के बाद
रात के ग्यारह बजे भी घर जागता रहता है। बच्चे शाम से ही तैयार हैं, किसी के सिर पर मोरपंख बार-बार खिसक रहा है, और कोई नीची मेज़ पर छोटा-सा पालना सजा रहा है जिसमें रुई की रजाई मोड़कर रखी है। सुबह से किसी ने कुछ खाया नहीं। बारह बजते ही शंख बजता है, नन्ही मूर्ति को दूध और शहद से नहलाकर पालने में लिटाया जाता है, और कमरा जय कन्हैया लाल की के जयकारे से भर जाता है। यही कृष्ण जन्माष्टमी है: ठीक जन्म की घड़ी पर मनाया गया जन्मदिन।
क्या मनाया जाता है
जन्माष्टमी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को पड़ती है, और विष्णु के आठवें अवतार कृष्ण के जन्म का दिन है। उनका जन्म मथुरा की कारागार में आधी रात को देवकी और वसुदेव के यहाँ हुआ था, और बाहर कंस उन्हें मारने के लिए तैयार बैठा था। यही बात पूरे त्योहार का ढाँचा तय करती है। रात का जागरण, आधी रात की घड़ी और अंधेरे में कुछ अनमोल के आने का भाव, ये सब पूजा का हिस्सा हैं, ऊपर से जोड़ी गई सजावट नहीं।
जन्म की रात
कथा जान लेना ज़रूरी है, क्योंकि आज की ज़्यादातर रस्में उसी की ओर इशारा करती हैं। कंस को बताया गया था कि देवकी का आठवाँ पुत्र उसका अंत करेगा, इसलिए उसने दोनों को बंदी बनाकर हर नवजात को मार डाला। कृष्ण के जन्म के समय पहरेदार सो गए, बेड़ियाँ खुल गईं, और वसुदेव उमड़ी हुई यमुना पार कर शिशु को गोकुल ले गए, जहाँ उन्होंने उसे नंद-यशोदा की नवजात पुत्री से बदल दिया। कहा जाता है कि यमुना ने रास्ता दिया और शेषनाग ने बारिश से बचाने के लिए फन तान दिया। कृष्ण गोकुल में ग्वाले के बेटे की तरह पले, माखन चुराते और बांसुरी बजाते। इस रात ज़्यादातर घरों में वही शरारती बालक आता है, गीता का सारथी नहीं।
कैसे मनाया जाता है
ज़्यादातर लोग दिन भर निर्जल या फलाहारी व्रत रखते हैं और आधी रात की पूजा के बाद, या अगली सुबह पारण करते हैं। घरों में झांकी सजाई जाती है, पालना और गोकुल का दृश्य, और बच्चों को कृष्ण और राधा के रूप में तैयार किया जाता है। बारह बजे मूर्ति का दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक होता है, फिर नए वस्त्र पहनाकर पालने में झुलाया जाता है। माखन मिश्री, धनिया पंजीरी और चरणामृत का भोग लगता है। दिल्ली एनसीआर के मंदिरों में रात भर कीर्तन चलता है; ईस्ट ऑफ़ कैलाश का इस्कॉन मंदिर और बिरला मंदिर आधी रात के बाद तक भरे रहते हैं। कुछ घंटे दूर मथुरा और वृंदावन में यह उत्सव कई दिन चलता है।
दही हांडी
जन्म के अगले दिन नंदोत्सव मनाया जाता है, जिसे कई जगह दही हांडी कहते हैं। गली के ऊपर दही और माखन से भरी हांडी ऊँचाई पर बाँधी जाती है और युवक एक-दूसरे के कंधों पर चढ़कर उसे फोड़ते हैं, कृष्ण और उनके सखाओं की माखन चोरी की याद में। महाराष्ट्र और गुजरात में इसकी धूम सबसे ज़्यादा है, पर दिल्ली की कॉलोनियों और आरडब्ल्यूए में भी अपने अंदाज़ में यह होता है।
सही समय चुनना
समय दो बातों से तय होता है। पूजा निशीथ काल में की जाती है, आधी रात के आसपास की वह छोटी अवधि जब कृष्ण का जन्म माना गया है, इसलिए यहाँ मुहूर्त घंटों का नहीं, मिनटों का मामला है। व्रत का पारण अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र की समाप्ति पर निर्भर करता है, और वह पूजा के तुरंत बाद नहीं, अगली सुबह भी पड़ सकता है। दोनों का मेल हर साल एक जैसा नहीं होता, इसीलिए कुछ घर और मंदिर एक ही वर्ष में अलग-अलग दिन जन्माष्टमी मनाते दिखते हैं। रात की तैयारी से पहले अपने शहर का निशीथ काल और पारण समय ऊपर दिए पंचांग में, या Kaalo ऐप में, ज़रूर देख लें।
आगामी तिथियाँ
- 2027बुधवार, 25 अगस्त 2027अगलाAshtami spans Aug 24, 20:25 - Aug 25, 19:20 IST; Smarta tradition observes Aug 24 night, Vaishnava Aug 25
- 2028रविवार, 13 अगस्त 2028Ashtami spans Aug 12 night - Aug 14, 05:37 IST; Smarta and Vaishnava unified
इस दिन का पंचांग
बुधवार, 25 अगस्त 2027
- तिथि
- अष्टमी (कृष्ण)7:20 pm तक
- नक्षत्र
- कृत्तिका12:28 pm तक
- योग
- व्याघात
- करण
- बालव
- वार
- बुधवार
- चंद्र राशि
- वृषभ
- सूर्य राशि
- सिंह
- सूर्योदय
- 5:55 am
- सूर्यास्त
- 6:51 pm
- चंद्रोदय
- 11:38 pm
- चंद्रास्त
- 1:14 pm
- विक्रम संवत
- VS 2084
- मास (पूर्णिमांत)
- भाद्रपद
- मास (अमांत)
- श्रावण