रक्षा बंधन
Raksha Bandhan
अगली तिथि
रक्षा बंधन
मंगलवार, 17 अगस्त 2027
338 दिन बाद
Purnima prevails at aparahna Aug 16; tithi ends Aug 17, 12:58 IST
रक्षा बंधन के बारे में
राखी का धागा जो भाई-बहन को रक्षा के बंधन में बाँधता है। रक्षा बंधन की सुबह घर में एक थाली घूमती है: दीया, थोड़ा रोली-अक्षत, दो-चार मिठाई और बीच में कुछ चमकता हुआ बँधा एक धागा। बहन वही धागा भाई की कलाई पर बाँधती है, माथे पर टीका लगाती है, और भाई बदले में कोई उपहार देकर उसकी रक्षा का अनकहा वादा करता है। यही धागा राखी है, और यही दिन रक्षा बंधन।
रक्षा बंधन 2026 की मुख्य तिथियां व समय
दिनांक: 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार)
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 27 अगस्त 2026 को सुबह 9:08 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 28 अगस्त 2026 को सुबह 9:49 बजे
भद्रा काल: 28 अगस्त को सूर्योदय से पहले समाप्त
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त: सुबह 5:57 बजे से सुबह 9:49 बजे तक
मुहूर्त की अवधि: 3 घंटे 52 मिनट
अर्थ
नाम का मतलब ही है, रक्षा का बंधन। राखी कोई गहना नहीं, एक वादा है जो दिख जाता है: भाई बहन के साथ खड़े रहने का संकल्प लेता है, और बहन उसकी लंबी उम्र और कुशलता की कामना करती है। समय के साथ यह रिश्ता सिर्फ़ सगे भाई-बहन तक सीमित नहीं रहा। लोग अब चचेरे-ममेरे भाइयों, क़रीबी दोस्तों और सैनिकों तक को राखी बाँधते हैं।
इसके पीछे की कथाएँ
इस धागे के पीछे कई कथाएँ हैं। सबसे प्रचलित कथा में द्रौपदी अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर कृष्ण की उँगली का घाव बाँधती हैं, और कृष्ण उस छोटे-से स्नेह का ऋण चुकाने का वचन देते हैं, जिसे वे बहुत बाद में निभाते हैं। एक और कथा में इंद्राणी युद्ध से पहले इंद्र की कलाई पर रक्षासूत्र बाँधती हैं। ब्योरे अलग हैं, पर धागे का अर्थ हर कथा में एक ही है: ऐसा स्नेह जो साथ खड़े रहने की ज़िम्मेदारी देता है।
कैसे मनाया जाता है
इस दिन सुबह स्नान और कहीं-कहीं छोटी पूजा के बाद परिवार एक साथ बैठता है। बहन आरती उतारती है, टीका लगाती है, दाहिनी कलाई पर राखी बाँधती है और मिठाई खिलाती है; भाई उपहार देता है और दोनों एक-दूसरे को आशीर्वाद देते हैं। खीर, घेवर और घर की बनी मिठाई उत्तर भारत में इस दिन की पहचान हैं। जो दूर रहते हैं वे हफ़्तों पहले राखी भेज देते हैं या वीडियो कॉल पर बाँध लेते हैं।
सही समय चुनना
यहाँ मुहूर्त का ध्यान बाक़ी त्योहारों से ज़्यादा रखा जाता है। परंपरा में राखी दिन के अपराह्न काल में बाँधना शुभ माना जाता है, और भद्रा के समय बाँधने से परहेज़ किया जाता है, क्योंकि भद्रा को इस काम के लिए अशुभ माना गया है। 2026 में भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाती है, इसलिए पूरी सुबह का समय खुला रहता है। धागा बाँधने से पहले अपने शहर का सही राखी मुहूर्त और भद्रा समय ऊपर दिए पंचांग में, या Kaalo ऐप में, ज़रूर देख लें।
आगामी तिथियाँ
- 2027मंगलवार, 17 अगस्त 2027अगलाPurnima prevails at aparahna Aug 16; tithi ends Aug 17, 12:58 IST
- 2028शनिवार, 5 अगस्त 2028Purnima until 13:39 IST; some observe Aug 4 (aparahna prevalence)
इस दिन का पंचांग
मंगलवार, 17 अगस्त 2027
- तिथि
- पूर्णिमा (शुक्ल)12:59 pm तक
- नक्षत्र
- धनिष्ठा2:32 am, 18 अग॰ तक
- योग
- शोभन
- करण
- बव
- वार
- मंगलवार
- चंद्र राशि
- मकर
- सूर्य राशि
- कर्क
- सूर्योदय
- 5:51 am
- सूर्यास्त
- 6:59 pm
- चंद्रोदय
- 7:00 pm
- चंद्रास्त
- 5:39 am
- विक्रम संवत
- VS 2084
- मास (पूर्णिमांत)
- श्रावण
- मास (अमांत)
- श्रावण